Friday, 12 July 2013

woh hari ghass ki mala

चेन्नई अपने आप में बहुत खूबसूरत शहर है, भगवान् शिव के पुत्र कार्तिक की पूजा स्थली, यहाँ हर मंदिर में भगवान् शिव की मोर के रूप में पूजा होती है, कहावत है की माँ पार्वती ने यहाँ शिव की इसी रूप में पूजा की थी। कपालेश्वर मंदिर कुछ प्रमुख मंदिरों में एक है, खैर इस शहर की एक परंपरा ने मुझे बेहद आकर्षित किया, यहाँ सब बहुत प्रोफेशनल है, यहाँ की पूजा की एक परंपरा के अनुसार भगवन गणपति की पूजा के लिए रोजाना हरी घास और धान चढ़ाया जाता है, इसी क्रम में जब मंदिर के बाहर बैठी महिला से बात हुई तोह उसने अपनी भाषा में कुछ कहा, दस मिनट का समय बिता कर जब हम चलने लगे तोह बताने के एवज में पैसे मांगने लगी, बॉस बात में तोह दम था, हम बेवजह किसी से भी युही जानकारिया झटक लेते है,  जिसमे हमारा तोह हित होता है पर सामने वाले का क्या, पहली बार पता चला इसकी भी कीमत है, खैर मत जी से दो प्यार के बोल कह कर हम आगे चल दियॆ, लेकिन सोचना बनता था की आखिर बेवजह किसी को समय क्यों दिया जाये, शायद इसीलिए इस शहर ने इतनी तररकी की,.माता जी को समझा कर हमने गुड की खीर का प्रसाद खाया और सटक लिए।।

Wednesday, 24 April 2013

udaipur



पत्रकारिता में रहते हुए मुझे शहर और गाव दोनों देखने का मौका मिला लेकिन शुरू से ही गाओं की दिनचर्या ने मुझे ज्यादा आकर्षित किया शायद इसलिए  की कभी गाव को नजदीक से नहीं देखा था, यूनिसेफ के एक कार्यकर्म के दौरान उदयपुर और जोधपुर जाने का मौका मिला, राजस्थान की अरावली पहाडियों का जितना खूबसूरत नज़ारा यहाँ से दिखाई देता है शायद ही राजस्थान के किसी और जिले में ऐसा नज़ारा हो
      मुख्य शहर से बीस किलोमीटर की दूरी पर ही सच्चाई पता चल जाती है। गुजरात की सीमा से लगे उदयपुर के खेरवाडा पंचायत अनुशुचित जाती और जनजाति के लोगो की करीब पचास हज़ार लोगो की आबादी है इस आबादी का पेट गुजरात से सत एक शहर हिम्मतनगर पाल रहा है राजस्थान के इस गो में बिजली की भी सुविधा नहीं है पहाडियों के ऊपर पोल नहीं पहुचाये जाते कहा जाता है की इसका पैसा सरकार  हमे नहीं देती बिजली चहिये तोह लेबर  का पैसा दो। कुछ तो गोव  छोड़कर चले गए कुछ लोग बिना बिजली पानी के यहाँ रहने को मजबूर है, इस इलाके के  ही कुछ लोग बी टी कॉटन की खेती भी कर लेते है। मोदी और राजस्थान की सरकार हालाकि बाल मजदूरी पर प्रतिबन्ध लगाने के बात कहती है लेकिन राजस्थान और गुजरात के इस बॉर्डर पर खूब बाल मजदूर काम करते है, दरसअल बी टी कॉटन का काम  परगन को एक फूल से दूसरे फूल में डालने का होता है यदि कोई व्यस्क इस काम को करता है तोह उसकी कमर झुक जाती है इसलिए इस काम के लिए विशेष रूप से बच्चो का इस्तेमाल होता है, गुजरात से उदयपुर सीमा के रास्ते से यहाँ बच्चो से बाल मजदूरी कराइ जाती है परगन जैसे मेहनत  भरे काम के एवज में सिर्फ ३०  रुपए मिलते है। ऐसे किस राज्य की सरकार को जनता का हितैषी कहा जाये,, शायद बच्चो वोट बैंक नहीं है इसलिए यह बेरूखी है।

ARE WE DOING RIGHT?



महिला अधिकरो पर बात करते ही जेहन में एक ही सवाल उठता है , यह आवाज यह धरना और यह विरोध तोह ठीक है लेकिन पर्दे के  पीछे का एक सच और भी है, यह नहीं कहूगी की महिलाये कानून का गलत इस्तेमाल करती है या फिर पुरुष उत्पीडन के शिकार हो रहे है। डर आने वाले कल की उस हकीकत का जिस पर आज धयान नहीं दिया जा रहा, आज ऑफिस में चर्चा हुई बलात्कार और वेश्यावृति की, दोनों अलग अलग बाते है क्या सच में अलग है,, गाँधी नगर बलात्कार मामले के ठीक एक दिन पहले नानकपुरा में एक नेपाली लड़की ने बलात्कार हुआ यह कहा पुलिस की थ्योरी में हलाकि शुरुआत में बलात्कार की पुष्ठी नहीं हुई लेकिन लड़की के आरोप ने मीडिया में खूब जगह बटोरी,,, अगले दिन ५ साल की मासूम के साथ दो लोगो ने बर्बर तरीके से बलात्कार किया,, घटनाये दोनों एक से है लेकिन एक फर्क है,,, नेपाली लड़की का आरोप था जिसे बाद में सही नहीं माना गया,  डर इस बात का ही है की कही ऐसा समय न आ जाये जब की झूठे और इरादतन आरोप में असल बलात्कार भी न छिप जाये,, निश्चित रूप से समाज में बलात्कार की घटनाये बढ़ने के साथ ही वेश्यावृति भी बढ़ी है लेकिन भविष्य में महिलाओ सुरक्षा के लिए एक मजबूत कानून बनाने के लिए यह जरूरी है की इन बलात्कार और वेश्यावृति के बीच के इस फर्क को मिटने न दिया जाये,,

Wednesday, 7 November 2012

khat


वोह ख़त के पुर्जे उड़ा रहा था
हवाओ का रुख दिखा रहा था

कुछ और भी हो गया नुमाया
में  अपना लिखा मिटा रहा था

उसी का इमा बदल गया है
कभी जो मेरा खुदा रहा था

वोह एक दिन एक अजनबी
मेरी कहानी सुना रहा था 

वोह उम्र कम कर रहा था मेरी
मे साल अपने बढ़ा  रहा था

यू ही कभी.....

Sunday, 4 November 2012

ek hai vishu

एक विशु है। मेरा प्यारा सा दोस्त बात करता है तोह बात कम लड़ाई जयादा करता है। यही कोई एक साल पहले मेरी मुलाकात उससे हुई,,,लखनऊ के एक साथी ने मुझे उसके बारे में  बताया,,,जब पहली बार मिली तोह जीवन की सारी गलत फेहमी दूर हो गयी,, घर के एक सोफे तक उसका जीवन सीमित है। 12 साल की उम्र में केवल 3 फीट लम्बाई। शरीर इतना नाजुक की गोद में उठाते ही उसकी हड्डी टूट जाती है,, लेकिन इस बच्चे में ऐसा खास क्या था जो मुझे बहुत कुछ सिखा गया,,वोह था उसके जीने का जज्बा,,,उसकी हार बात गहरी और सच्ची होती है,,, मुझे उससे अजीब सा लगाव हो गया,, कुछ दिन बात हुई उसकी खवाइश थी सलमान से मिलने की वोह भी पूरी हो गयी,,लेकिन इस सबके बीच एक बात अजीब लगी,,उसकी जो बाते मुझे जीवन का आइना दिखाती है,,,लोगो लो उसमे मनोरंजन नज़र आया सलमान के साथ एक कंपनी के मालिक ने कहा इसे बिग बॉस में ले लेते है ,,,,खूब टीआरपी बढ़ेगी,,,,वोह मनोरंजन नहीं है,,उसकी मासूम बाते वोह नहीं समझ सके वोह हरदम मुस्कुराता है,,, अपने हर गम को भूल कर इसलिए नहीं की वोह मनोरंजन का एक माध्यम है,,,,यहाँ मई यह बता दू की उसको ओस्टो जेनिसिस बीमारी है,,,जिसका कोई इलाज नहीं,,,वोह अपने हौसलों से लाचार नहीं


Thursday, 1 November 2012



लम्बे अरसे से खवाइश थी,, इस मंच पर  अपनी बात कहने की कुछ सुनने की और कुछ सुनने की
ज़िन्दगी की मश्रुफ़िअत इसका भी मौका नहीं देती है लेकिन इन्ही मुरूफिअत में ही अपनों के लिए समय निकलना असल जिंदगी है, ब्लॉग पर आने का मेरा सीधा मतलब है,,आम जीवन में आस पास ऐसा बहुत कुछ घटता है, जिसे नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता, मेरा मानना है की वोह मनुष्य ही नहीं जिसका जीवन खुद तक सिमट गया। हम समाज के लिए बहुत कुछ नहीं के लिए बहुत कुछ नहीं कर सकते लेकिन बेरूखी छोड़ दे तो बहुत कुछ हो सकता है, आज दूर कही से रेडियो की आवाज आ रही है, रात के महफ़िल के 70 के दशक के पुराने नगमे,  कुछ वैसे ही जैसे गावो में रात के सन्नाटे में झिगुर की मधुर आवाज सुने देती थी, शायद यह आवाज भी इसीलिए आई की आज से कुछ घरो का केबल बंद हो गया है,  इसी एक वजह से आज मुझे भी कुछ लिखने का समय मिला।

बाकि परिचय के लिए इतना काफी है बाते और भी है,